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Nagaur, Rajasthan, India
नागौर जिले के छोटे से गांव भूण्डेल से अकेले ही चल पड़ा मंजिल की ओर। सफर में भले ही कोई हमसफर नहीं रहा लेकिन समय-समय पर पत्रकारिता जगत में बड़े-बुजुर्गों,जानकारों व शुभचिंतकों की दुआ व मार्गदर्शन मिलता रहा। उनके मार्गदर्शन में चलते हुए तंग,संकरी गलियों व उबड़-खाबड़ रास्तों में आने वाली हर बाधा को पार कर पहुंच गया गार्डन सिटी बेंगलूरु। पत्रकारिता में बीजेएमसी करने के बाद वहां से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक के साथ जुड़कर पत्रकारिता का क-क-ह-रा सीखा और वहां से पहुंच गए राजस्थान की सिरमौर राजस्थान पत्रिका में। वहां लगभग दो साल तक काम करने के बाद पत्रिका हुबली में साढ़े चार साल उप सम्पादक के रूप में जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बाद अब नागौर में ....

दिसंबर 31, 2010

नए संकल्प से नव वर्ष का स्वागत

वर्ष भर चले खुशियों का सिलसिला

धर्मेन्द्र गौड़

कुछ खट्टी,कुछ मीठी यादों के साथ कई उतार-चढ़ावों का साक्षी रहा यह २०१० भी बीत गया और अब नया साल नई उम्मीदों,नई सौगातों व ढ़ेरी सारी खुशियां अपनी झोली में समेटे फिर आ गया है। साल की विदाई के साथ ही प्रति वर्ष नए साल की शुरुआत होती है और बधाइयों का दौर शुरू हो जाता है। बीती ताहि बीसार दे आगे की सुध लेय...वाली तर्ज पर लोग पुरानी बातों को भूलाकर या अतीत में की गई गलतियों को सुधारने के संकल्प के साथ करते है नए साल की शुरुआत। नए साल का स्वागत महज एक आयोजन ही नहीं बनना चाहिए। यह समय वर्ष भर में किए गए कार्यों के आत्मावलोकन का समय है। ऐसा माना जाता है कि किसी भी कार्य की शुरुआत अगर अच्छी हो तो फिर सब ठीक होता है। इसी मनोवृत्ति को दृष्टिगत रखकर लोग कार्य करते हैं। यह सिलसिला महज एक दिन यानी एक जनवरी को ही बल्कि हर सुबह होना चाहिए। वैसे तो भारतीय संस्कृति में ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन कोई पर्व, उपवास या अन्य कोई महत्वपूर्ण प्रसंग नहीं हो। कैलेंडर के ३६५ दिनों में हर सुबह की शुरुआत कुछ इस तरह से की जाए कि दिन चैन व शुकून भरा हो। अगर व्यक्ति प्रतिदिन शुभाशुभ का चिंतन कर शुभ के लिए प्रयास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले तो उसके रोजमर्रा के जीवन में आने वाली अनेक परेशानियां व समस्याएं स्वत: ही खत्म हो जाएगी। साल भर में हमनें क्या खोया और क्या पाया इसके हिसाब का वक्त है नया साल।
राष्ट्र हित में हो चिंतन
हर नई सुबह की पहली किरण हर पल कुछ खास संदेश देती है। वह सुबह मासूम तो दोपहर में तेज व अपराह्न में फिर कमजोर होते होते वह शाम को फिर शीतल हो जाती है। कहते हैं कि रात जितनी घनी व अंधियारी होती है भोर का उजाला उतना ही आनंदायी होता है। अपनी अंतरात्मा से एक ही सवाल करें कि साल भर में उसने राष्ट्र हित में कितने कार्य किए, भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया या उसका डटकर मुकाबला किया, समाज से जुड़े कार्यों में आपका कितना योगदान रहा,समाज में व्याप्त बुराइयों में भागीदार बने या उनका प्रतिकार किया। साल के पहले दिन महज संदेश भेजकर नया साल मुबारक कह देने भर से ही व्यक्ति की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। यह सिलसिला उसे वर्ष भर जारी रखना चाहिए। वर्ष भर शुभकामना संदेश के बदले अपने आसपास,अपने परिवार,समाज या मित्र मंडली के सम्पर्क में रहते हुए उनके सुख-दुख में भागीदार बनकर उनकी समस्याओं का हल निकालने में साझेदार बनें।
भ्रष्टाचार का विरोध जरुरी
आज भौतिकवाद की अंधी दौड़,पाश्चात्य संस्कृति के प्रति बढ़ता आकर्षण,समाज का बदलता स्वरूप, राजनीति की बदलती तस्वीर सबके सामने है। देश भर में व्यापक स्तर पर फैले भ्रष्टाचार का मुकाबला एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है और हर क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक दखलंदाजी के कारण व्यक्ति चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता। लेकिन व्यक्ति नए साल में इतना संकल्प तो कर ही सकता है कि वह किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देगा। कोई काम एक दिन देरी से होगा तो कोई बात नहीं लेकिन सरकारी दफ्तर में किसी बाबु को काम के बदले रिश्वत नहीं देंगे। अगर यात्रा करनी है तो समय रहते आरक्षण टिकट बनवाएंगे। मजबूरी में आपात स्थिति में यात्रा करनी पड़े तो प्रतीक्षा सूची या तत्काल टिकट लेकर जाएंगे लेकिन टिकट से दुगुनी राशि एजेंट को देकर टिकट नहीं बनवाएंगे। यह तो उदाहरण मात्र है। व्यक्ति की देश के सकल घरेलू उत्पाद या यों कहें कि देश के विकास में आम आदमी का अहम योगदान है। व्यक्ति आय कर,रोड टेक्स,प्रोपर्टी टेक्स देता है और अनेक प्रकार से वह राष्ट्र विकास में भागीदार बनता है।
समाज हित सर्वाेपरि
आज समाज में दो तरह के लोग है एक वे जो धारा के साथ चलते हैं और एक वे जो धारा के प्रतिकूल। धारा के साथ चलना सरल है लेकिन धारा के प्रतिकृल चलना न केवल कठिन है बल्कि उसमें जोखिम भी कमतर नहीं है। लेकिन धारा के विपरीत चलकर काम करने के बाद जो आत्म संतुष्टि होती है उसका अलग ही आनंद है। हो सकता है आपके विरोध करने से कुछ जगह आप चर्चा का विषय बन सकते हैं या फिर लोग आपको समाज सुधारक की संज्ञा भी दे सकते हैं लेकिन कानूनी दायरे में रहते हुए सबको अपना कार्य करना चाहिए। आज हर कोई कहता है कि मैं अकेला क्या कर सकता हूं। सभी इसी तरह सोच रहे हैं तो फिर समाज से भ्रष्टाचार बढ़ेगा ही कम नहीं होगा। आज देश में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है। पैसे वाले के लिए रिश्वत देकर काम करवाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन उस आम आदमी का क्या होगा जो महज दो रोटी का जुगाड़ ही मुश्किल से कर पाता है या फिर इतना कमाता है कि उसका गुजारा आराम से चल जाता है। ऐसे में किसी काम के लिए उसके पास रिश्वत कहां से आएगी। आरक्षित टिकट के लिए एजेंट को देने के लिए पांच सौ रुपए वह कहां से लाएगा।
संकल्प को पूरा करें
नया साल पिछली बार भी आया था इस बार भी आया है। हर साल की तरह इस बार भी फिर से शामिल हो गए जिंदगी की दौड़ में। जीने की हौड़ में फिर से आगे बढ़ रहे हैं। नए साल पर संकल्प लें कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद वे बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान देंगे। समय निकालकर जितना हो सके उतना परोपकार के कार्य में भागीदार बनेंगे। समाज को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करेंगे। नया साल आता है और चला जाता है। हर नए साल का हम उत्साह से स्वागत करते हैं तथा नववर्ष की पूर्व संध्या पर आगामी वर्ष को बेहतर बनाने के लिए संकल्प लेते हैं। हमारे संकल्पों के पूरा न होने का एक कारण तो यही है कि हम अपने संकल्प के प्रति आश्वस्त ही नहीं होते अर्थात हमें विश्वास ही नहीं होता कि हमारा संकल्प पूरा हो जाएगा। यदि आप चाहते हैं कि आपके संकल्प पूरे हों तो सबसे पहले यही संकल्प लीजिए कि मेरे सभी सकारात्मक संकल्प या विचार सदैव पूर्ण होते हैं। यहां एक बात और भी महत्वपूर्ण है कि हम जाने-अनजाने हर क्षण संकल्प लेते ही रहते हैं। हमारे मन में उठने वाला हर विचार एक संकल्प ही तो है। यदि हम अपने अंदर ये विश्वास पैदा कर लें कि हमारे सभी सकारात्मक विचार या संकल्प पूर्णता को प्राप्त होते हैं तो जीवन में एक क्रांति आ जाए। हमारे असंख्य उपयोगी विचार पूर्ण होकर हमारे जीवन और पूरे समाज को बदल डालें। अत: सबसे पहले अपने संकल्प की पूर्णता के प्रति अपने मन में पूर्ण विश्वास पैदा कीजिए।

नए संकल्प से करें नव वर्ष का स्वागत


नए संकल्प से नव वर्ष का स्वागत

दिसंबर 28, 2010

प्री पेड ऑटो सेवा का इंतजार

-सूना पड़ा रेलवे स्टेशन पर केबिन
-यात्री परेशान

हुबली. हुबली रेलवे स्टेशन पर प्री-पेड ऑटो रिक्शा सुविधा बंद होने के चलते यात्रियों को शहर में गंतव्य तक जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। हुबली रेलवे स्टेशन पर शुरू की गई प्री पेड ऑटो रिक्शा सुविधा लगभग एक साल से बंद है। इसका खामियाजा यात्रियों को अधिक किराया चुकाकर भुगतना पड़ रहा है।
हुबली से आसपास के शहरों में नौकरी के सिलसिले में जाने वाले लोग देर तक हुबली पहुंचते हैं और वे जल्दी घर पहुंचने के लिए बस के बजाय ऑटो से जाना ठीक समझते हैं लेकिन प्रीपेड ऑटो नहीं होने के कारण उनको ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। बाहर से आने वाले यात्रियों को स्थानीय नगरीय परिवहन बस सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे ऑटो रिक्शा से ही गंतव्य तक जाना उचित समझते हैं।

लेते हैं मुंह मांगा किराया
रेलवे स्टेशन पर आरक्षण काउंटर के आगे प्री पेड ऑटो रिक्शा के लिए जगह निर्धारित कर एक केबिन का निर्माण कराया गया था। इस केबिन में विद्युत कनेक्शन भी है। जो अब उपयोग में नहीं लिया जा रहा है। केबिन खुला ही पड़ा रहता है और इसमें कागज, लकडिय़ां व अन्य फालतू सामान बिखरा पड़ा है। रेल से यात्रा कर हुबली आने वाले यात्रियों को शहर में दूर दराज के इलाकों में जाने के लिए ऑटो में ही जाना पड़ता है। ऐसे में उनको स्टेशन के सामने खड़े ऑटो की सेवाएं लेनी पड़ती है। ये ऑटो चालक मुंह मांगी कीमत मांगते हैं ऐसे में कई बार उनको न चाहते हुए भी अधिक किराये का भुगतान कर घर तक पहुंचना पड़ता है।

प्री पेड ऑटो सुविधा जरुरी
स्टेशन पर प्रीपेड ऑटो सुविधा नहीं होने के कारण वे हुबली पहुंचते ही स्टेशन पर हर रोज अपने घर से किसी को बुलाती हैं। बाहर वाले ऑटो के साथ रात के समय अकेले जाना खतरे से खाली नहीं होता। कभी कभार ऑटो चालक अपने दोस्तों को भी साथ में बिठा लेता है। ऐसे में अकेली महिलाएं ऑटो में जाने से परहेज करतीं है। परंतु प्री पेड ऑटो के साथ यह दिक्कत नहीं है क्योंकि उस ऑटो का रिर्कार्ड ऑटो बूथ पर रहता है। अगर कभी कुछ हादसा हो जाए तो उसकी शिकायत आसानी से की जा सकती है। इसलिए स्टेशन पर बूथ होनी चाहिए। -सुमन रेवणकर, महिला कर्मचारी

ऑटो चालकों के हित में नहीं
प्री पेड ऑटो सेवा से हमको नुकसान होता है। किराये को लेकर रोज ग्राहकों व प्री पेड बूथ वालों के साथ झगड़ा होता था। बूथ वाले बिना सोचे समझे कम किराये में भी शहर में कहीं भी जाने के लिए बोले देते थे। उनको पास पूरे शहर का श्रेणी वार विभाजन कर किराये की दर तय करनी चाहिए। लेकिन वे ग्राहक के कहने पर उस एरिया की रसीद दे देते थे लेकिन कई क्षेत्र काफी लम्बे चौड़े क्षेत्र में होने से हमको वहां तक जाना महंगा पड़ता था। ऐसे में हम घाटा खाकर वहां क्यों जाए। इसके अलावा लगेज को लेकर भी ग्राहकों से तू-तू मैं-मैं हो जाती थी। यह बूथ साल भर से बंद है। -ऑटो चालक

राजस्थान पत्रिका,हुबली संस्करण में २९ दिसम्बर २०१० को प्रकाशित

दिसंबर 27, 2010

जनरल बोगी में भी मिलेगा खाना

महफूज नहीं आपका वाहन

-रेलवे स्टेशन बना चोरों का ठिकाना!
हुबली
अगर आप अपने रिश्तेदार या परिचितों को छोडऩे या लाने हुबली रेलवे स्टेशन पर जा रहे हैं तो वहां पर वाहन खड़ा करने से पहले सोच लें। क्योंकि आप जब तक प्लेटफार्म से बाहर आएंगे आपका दुपहिया वाहन वहां सुरक्षित मिलेगा,इसकी गारंटी नहीं है। हो सकता है आप स्टेशन पर खड़े हों और शातिर चोरों की नजर आपकी गाड़ी पर हो। जब तक आप आएंगे वे अपनी कारस्तानी को अंजाम दे चुके होंगे। बेहतर होगा कि आप अपने वाहन का ध्यान खुद रखें। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों व नागरिकों की सुविधा के लिए रेलवे ने पार्किंग का ठेका दिया है और ठेकेदार का आदमी आपसे पार्किंग का पैसा वसूलेगा लेकिन वाहन की सुरक्षा की गारंटी वह भी नहीं लेता।
...और गायब मिला
तीन दिन पहले बुधवार शाम किसी रिश्तेदार को लाने के लिए रेलवे स्टेशन गए पाठक ने बताया कि जब वह उनको लेकर आए तो उनकी मोटरसाइकिल वहां पर नहीं थी। पहले तो काफी देर तक इधर-उधर तलाश की लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस चौकी जाकर जानकारी दी। इस पर चौकी पर तैनात संबंधित पुलिस अधिकारी ने कहा कि गुरुवार शाम तक इंतजार करो, हम अपने स्तर पर गाड़ी को ढ़ूंढने का प्रयास करते हैं। अगर नहीं मिली तो रिपोर्ट लिखवा देना। इसके बाद पीडि़त व्यक्ति वापस आ गया। गुरुवार को भी गाड़ी नहीं मिलने पर पीडि़त फिर पुलिस चौकी गया व गाड़ी के बारे में पूछताछ की लेकिन पुलिस ने बताया कि अभी तक गाड़ी का कोई पता नहीं चला है। शुक्रवार को पीडि़त ने मोटरसाइकिल चोरी होने की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई।
कहीं भी पार्क कर देते
हालांकि रेलवे ने पार्किंग के लिए एक स्थान तय कर रखा है बावजूद इसके लोग स्टेशन के मुख्य द्वार के सामने तक गाडिय़ां पार्क कर देते हैं। मुख्य द्वार के बायीं तरफ लगे एटीएम के पास भी जगह पर भी लोग वाहन पार्क कर देते हैं। रेलवे या संबंधित ठेकेदार का कोई आदमी वहां लोगों को गाड़ी पार्क करने से नहीं रोकता।
ठेकेदार की है जिम्मेदारी
हुबली मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्टेशन पर वाहन पार्किंग के लिए दी गई निविदा में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि स्टेशन पर शुल्क अदा कर निर्दिष्ट स्थान पर पार्क किए जाने वाले वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार अन्य स्थानों के बाद अब रेलवे स्टेशन परिसर में पार्किंग स्थल से गाड़ी का गायब होना गंंभीर मामला है। इसके पीछे किसी बड़े वाहन गिरोह का हाथ भी हो सकता है। चोरी गई गाडिय़ों की कम बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि चोर यहां से गाड़ी चुराने के बाद या तो उसके पार्ट्स अलग-अलग कर बेच देते हैं या फिर गाड़ी को किसी दूसरे शहर में भेज देते हैं ताकि यहां वह पुलिस की पकड़ में आने से बच सके।
...
मामला दर्ज हुआ है
वैसे तो स्टेशन पर वाहन चोरी के मामले कम ही सामने आते हैं।शुक्रवार दोपहर एक मामला दर्ज किया गया है। पीडि़त की ओर से दर्ज रिपोर्ट के आधार पर जांच की जा रही है। -बाबुराव कुलंदवाड़, सहायक निरीक्षक जीआरपी पोस्ट, हुबली स्टेशन

यह राजस्थान पत्रिका,हुबली के २६ दिसम्बर २०१० के अंक में प्रकाशित हुई है..